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मां दुर्गा की तीसरी शक्ति मां चंद्रघंटा के नाम से प्रसिद्ध हैं। इनके मस्तक पर घंटे के आकार का अद्र्धचंद्रमा सुशोभित है। स्वर्ण के समान इनका दमकता हुआ तेजोमय स्वरूप है। इनके दस हाथ हैं, जिनमें अस्त्र-शस्त्र लिए हुए मां सिंह पर आरूढ़ हैं। मां राक्षसों के विनाश के लिए युद्ध में प्रस्थान करने को उद्यत हैं। मान्यता है कि इनके घंटे की ध्वनि सुनकर दैत्य, राक्षस आदि भाग जाते हैं।

स्वरूप का ध्यान

मां के दिव्य स्वरूप का ध्यान हमें आत्मिक रूप से सशक्त बनाता है और भय-बाधाओं से दूर रखता है। इस स्वरूप से प्रेरणा यह मिलती है कि यदि हमारे भीतर अच्छाइयों की शक्ति है, तो उसके सामने नकारात्मक ऊर्जा नहीं टिक पाती। बस, हमें अच्छे कर्मों में प्रवृत्त रहना चाहिए। मां का ध्यान हमारे जीवन में बाधक बन रहे कुसंस्कारों का समूल नाश कर हमें नैतिक रूप से सबल बनाता है। मां के तेजोमय स्वरूप का ध्यान सद्गुणों के तेज से हमारे व्यक्तित्व को आलोकित करता है और शक्ति प्रदान करता है। 

आज का विचार 

भले ही हमारे जीवन में कितना भी अंधेरा हो, लेकिन यदि प्रकाश की एक किरण भी दिखाई दे जाए, तो सब प्रकाशित हो जाता है। अत: सकारात्मकता के उजाले को सदैव साथ रखें।

 

ध्यान मंत्र

पिंडज प्रवरारूढ़ा चंडकोपास्त्रकैर्युता।