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देखो ! लगा प्यार का बाजार है,
बेचो ताजमहल तो मिलती मुमताज़ है 

रिश्तों की बोली लग रही देखो,
रूपये पैसों के इस नीलामी में 

काँटें भी कर रहे शिकार देखो,
फूलों के प्रलोभन दिखाके कैसे I

धर्म भी देखो ले आता अखाड़े में,
दिखाए शांति के परम मार्ग को I

भ्रष्टाचार भी मुस्कुराता देखो,
रक्तबीज सा खुद को फैलाए हुए II

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